Tuesday, November 16, 2010

वह बादल हूं मैं.


वह बादल हूं मैं

जो आसमान में अकेला, अवारा है.

मेरे कोई पंख नहीं है

फ़िर भी मैं भटकता रहता हूं,

जरुरतमंदो की तलाश में.

कहीं कहीं भू ऐसे है

जहां है पर्याप्त जल

नहीं उनको मेरी आवश्यकता

वो क्या मेरे मह्तव को समझ सकता,

इसलिए जब कहीं दिख पडते है मुझे

फ़टी धरती, आकाश पर ठहरते नेत्र

उनकी

इच्छा पूरी करने के लिए

मैं बरस पडता हूं,

बरसने के लिए

लड पडता हूं.

मैं सोचता हूं- यहीं खत्म हो गई मेरी कहानी

पर बाद में पता चलता है-

भगवान ! मुझे भाप बनाकर

फ़िर ऊपर

बादल बनाकर

मुझे लोगो की सेवा के लिए देवदूतबना देता है.

मैं वह बादल हूं.

-मोहसिन

गूगल चित्र साभार

Thursday, November 11, 2010

आज का विचार ५


सत्य के लिए हर वस्तु की बलि दी जा सकती है, किंतु सत्य की बलि किसी भी वस्तु के लिए

नहीं दी जा सकती।


** स्वामी विवेकानंद

Wednesday, November 10, 2010

आज का विचार ४


१. भूल करना मनुष्य का स्वभाव है, की गई भूल को स्वीकार करना एवं वैसी भूल फ़िर न करने का प्रयास न करना वीर एवं शूर होने का प्रतीक है.

२. अंधा वह नहीं, जिसकी आंख नहीं है। अंधा वह है, जो अपना दोष छिपाता है.


** महात्मा गांधी

Tuesday, November 9, 2010

कोई है


रिश्ता वह नहीं जो हम बनाते हैं,

रिश्ता वह है जिन्हें वक्त बनाता है.

कोई वह तो नहीं जिन्हें सिर्फ़ हम चाहते हैं,

कोइ वह भी है जो शायद हमें चाहता है.

(यह पंक्ति मुझे sms द्वारा एक मित्र से प्राप्त हुई थी जिसे मैंने आपके साथ बांटा है.)